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Holi 2024: लड़की पहली होली ससुराल में क्यों नहीं मनाती? यहाँ जानिये इसके पीछे की असली वजह। ताकि आपको पता हो नई दुल्हन पहली होली अपने मायके में क्यों मनाती है, ससुराल में क्यों नहीं।

पहली होली में मायके चली जाती है नई दुल्हन

Trending News in Hindi – हर त्यौहार के पीछे एक बड़ी कहानी होती है। जिसे याद रखने के लिए या उससे कुछ सीखने के लिए लोग हमेशा उसे दिन को मनाते है। इसी तरह होली का त्यौहार भी अपने साथ कई कहानियां लेकर चल रहा है। वही आपने सुना देखा होगा कि नई दुल्हनें पहली होली ससुराल में नहीं मनाती है। बल्कि अपने मायके चली जाती हैं। लेकिन क्या आपको इसके पीछे की असली वजह मालूम की है। अगर नहीं तब आइये हम बताते हैं कि ऐसा क्यों होता है।

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इसके पीछे की वजह क्या है ?

पहली होली नई दुल्हन अपने मायके में मनाती है। जैसा कि आप जानते हैं होली खेलने से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। बता दे की होलिका एक लड़की का नाम था। जो की हिरणकश्यप की बहन थी, और हिरणकश्यप के बेटे थे प्रह्लाद। आपने तस्वीरों में देखा होगा एक लड़की अपनी गोद पर एक बच्चा लेकर आग में जल रही है, तो होलिका ही वह लड़की थी जो अपने गोद में अपने भाई के बेटे को लेकर जलने के लिए गई थी।

दरअसल, प्रह्लाद एक विष्णु भक्त थे और उनके पिता हिरणकश्यप देवताओं के विरुद्ध थे। वह विष्णु का विद्रोह करते थे। क्योंकि वह दैत्य कुल से थे। यानी की दैत्य कुल में एक विष्णु भक्त का जन्म हुआ। इसी कारण हिरणकश्यप अपने बेटे प्रह्लाद को मार देना चाहते थे। क्योंकि उनके मुंह से श्री हरि उनको बिल्कुल बर्दाश्त नहीं था। वह चाहते थे कि प्रह्लाद अपने पिता हिरणकश्यप को पूजे, ना कि विष्णु भगवान को। इसलिए उन्हें मारने का हर तरह से प्रयास करते थे।

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जिसमें हिरणकश्यप ने प्रह्लाद को सांपो के कमरे में बंद किया, पहाड़ों से फेंकने की कोशिश की, जंजीरों से बांध के पानी में डुबो दिया, हाथी के पैरों से उन्हें कुचलवाने का भी प्रयास किया। लेकिन हर बार प्रह्लाद बच गए। फिर उनकी बहन होलिका ने प्रह्लाद को मारने के लिए अपने उस वस्त्र का इस्तेमाल किया जो आग में नहीं जल सकता था। वह उसे ओढ़कर आग में बैठ गई और अपने गोद में प्रह्लाद को बैठा लिया। ताकि प्रहलाद जलकर खत्म हो जाए। लेकिन विष्णु जी ने ऐसी लीला रचाई की वह वस्त्र प्रह्लाद के ऊपर गया और होलिका जल गई।

बता दे कि उसी दिन होलिका की शादी थी। उनके ससुराल वाले बारात लेकर गए और सास ने देखा कि बहू आग में जलकर राख हो रही है। जो कि उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने इस दुख में प्राण त्याग दिए। यानि कि उनकी जान चली गई। वह देख नहीं पाई कि उनके बेटे का घर किस तरह बसने से पहले ही उजड़ रहा है। इस तरह उसी दिन से कोई भी बेटी ससुराल में होली नहीं मानती है। बल्कि उस दिन अपने मायके चली जाती है। आईए जानते हैं होलिका दहन हर साल क्यों मनाया जाता है।

होलिका दहन आज तक क्यों मनाया जा रहा है ?

होलिका दहन हर साल मनाया जाता है। इसके पीछे की वजह यह है कि इस दिन अच्छाई के आगे बुराई हार गई। बुराई का नाश हुआ। अच्छाई की जीत हुई। कितनी भी कोशिश करने के बाद भी प्रह्लाद जो की एक विष्णु भक्त थे, उन्हें कोई मार नहीं सका और इस दिन को लोग याद करते हुए हर साल होलिका दहन करते हैं और बुराई का नाश होते हुए देखते हैं। अपनी नजर उतार कर होलिका के साथ जला देते है।

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